यूहीं बात बात में उसकी याद आ गयी
जिसका हमसे पहले कभी एक छोटा सा रिश्ता था अनोखा सा
दिल भर उठा, आँखें भारी हो गयी यह सोचके की
जिंदगी भी कैसी करवटे लेलेती है बिन हमारे इशारे की
आज मैं यहाँ हूँ और वो वहाँ लेकिन देखो क्या है अब हमारे बीच
एक लंबा अरसा जो बीत गया जिसे मैं प्यार कहता था आज उसीकी यादे मेरे इन पंक्तियों में से देख कर मानो हस रही है मुझसे तरस खाकर.
अचानक ऐसा मोड़ आ गया हम दूर हो गए उस से फिर मिलने की क्या यादों में रह गयी वोह
मेरा प्यार आज उसके लिए जो है उससे मैं इन कविताओं में भरपूर उसकी यादों में समर्पित कर रहा हूँ ओ जान-इ-मन