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चलते चलो

चलते चलो चलते चलो
गिरे चट्टान या आए तूफान
होकर तूम निडर ; लक्ष्य पर ध्यान मग्न कर
लेते चलो विजय का पथ

कृष्ण के उपदेश से डरपोक हुआ वीर
नहीं है कोई यहाँ कायर , जो सोचे वही
अपनी अकलमंदी अपनी विद्या ले चलेगी
तुम्हे उन्नत शिकरों पर ; कष्ट से कभी झुको नहीं
नष्ट से कभी रखो नहीं लक्ष्य साधन ही एक अनमोल वस्तु है

जीवन तो एक सफर है जहाँ हर दिशा से
कठिनाइयां गुजरती है पर रहो डट कर अपने पथ पर
चलते चलो चलते चलो

वक्त है आगे कुछ कर दिखाने का लहू है ना ठंडा पड़ने का
जीवन के हर खुशी बाँट लो निडर हो कर जीयो हर दिन
एक नई शुरुआत दो तुम जिंदगी को एक नई उमंग दो तुम आपने विचारों को
चलते चलो चलते चलो
चाहे थकान भी थक कर ठहर जाएं कहीं वक्त से आगे बड़ते चलो